एक छोटे से गाँव में सैमुअल नाम के एक बुजुर्ग दर्जी और उनकी पत्नी मार्था रहते थे। उम्र बढ़ने के साथ सैमुअल के हाथों की फुर्ती कम हो गई थी, जिससे उनके लिए गुजारा करना मुश्किल हो गया था।
एक शाम, सैमुअल अपने पास बचा आखिरी चमड़े का टुकड़ा सिल रहे थे। "मार्था, यह हमारे पास बचा आखिरी टुकड़ा है," उन्होंने उदास होकर कहा। मार्था ने चिंता जताते हुए कहा, "इसे आज ही पूरा कर लीजिए, पता नहीं कल क्या होगा।"
थककर सैमुअल ने वह टुकड़ा मेज पर रखा और सो गए। अगली सुबह जब वे जागे, तो दंग रह गए! वह चमड़ा एक बहुत ही सुंदर जैकेट में बदल चुका था। एक व्यापारी ने उसे बहुत ऊँचे दाम पर खरीद लिया।
इससे खुश होकर सैमुअल ने और चमड़ा खरीदा और हर रात मेज पर रखकर सो जाते। हर सुबह उन्हें सुंदर कपड़े तैयार मिलते। धीरे-धीरे उनकी दुकान मशहूर हो गई।
एक दिन सैमुअल के मन में लालच आ गया। उन्होंने मार्था से कहा, "हमें अब मेहनत करने की क्या ज़रूरत है? हम बस इन मददगारों के लिए खाना छोड़ देंगे और वे हमारे लिए काम करेंगे।"
यह देखने के लिए कि क्या होता है, वे एक रात अलमारी के पीछे छिप गए। उन्होंने देखा कि दो छोटे जादुई बौने कमरे में आए और बहुत कुशलता से सिलाई करने लगे। सैमुअल और मार्था बहुत खुश हुए। कुछ दिनों तक उन्होंने बौनों के लिए अच्छा खाना और नए कपड़े भी रखे।
लेकिन एक सुबह, मेज पर रखा खाना और चमड़ा वैसा का वैसा ही था। बौने नहीं आए! मार्था ने दुखी होकर कहा, "सैमुअल, जैसे ही आपने मेहनत करना छोड़ा और किस्मत के भरोसे बैठ गए, जादू खत्म हो गया। वे हमारी मदद इसलिए करते थे क्योंकि हम भी काम करते थे।"
सैमुअल को अपनी गलती का अहसास हुआ। उन्होंने फिर से अपनी सुई-धागा उठाया और मेहनत करना शुरू किया। जैसे ही उन्होंने फिर से काम में मन लगाया, वे नन्हे बौने भी वापस आ गए और उनकी मदद करने लगे। अब वे फिर से खुशी-खुशी रहने लगे।