एक बहुत बड़े और घने जंगल में बहुत सारे जानवर रहते थे। उस जंगल का एक पुराना नियम था: 'इंसानों की बस्ती की ओर कभी मत जाना।' पूर्वजों ने सिखाया था कि इंसानों से दूर रहना ही सबसे सुरक्षित है।
एक सुबह, कपी नाम के बंदर ने देखा कि ज़मीन पर एक रंग-बिरंगा पक्षी दर्द से तड़प रहा है। कपी तुरंत नीचे उतरा और पूछा, "नन्हे पक्षी, तुम्हें क्या हुआ है?"
पक्षी ने रोते हुए कहा, "मैं बहुत दूर के देश से उड़कर आ रहा था। रास्ते में एक गाँव के पास कुछ इंसानों ने मुझ पर पत्थर फेंक दिए। मेरे पंख में चोट लग गई और मैं उड़ नहीं पा रहा हूँ।"
कपी उस पक्षी को जंगल के वैद्य, कछुआ दादा के पास ले गया। कछुआ दादा ने बहुत प्यार से जड़ी-बूटियाँ लगाईं और नरम पत्तियों से पक्षी के पंख पर पट्टी बाँधी। कुछ ही दिनों में पक्षी ठीक होने लगा।
लेकिन पक्षी उदास था। उसने कहा, "मुझे अपने घर वापस जाना है, पर मैं कैसे जानूँ कि इंसानों की बस्ती कहाँ है? मैं फिर से चोट नहीं खाना चाहता।"
तभी वहाँ एक चतुर लोमड़ी आई। उसने कहा, "घबराओ मत! एक आसान तरीका है। अगर तुम आसमान में बहुत सारे कौवे देखो, या ज़मीन पर कुत्तों को दौड़ते हुए देखो, तो समझ जाना कि वहाँ इंसान रहते हैं। बस उन कौवों और कुत्तों से दूर रहकर अपना रास्ता चुन लेना।"
लोमड़ी की सलाह मानकर, पक्षी ने आसमान में कौवों और ज़मीन पर कुत्तों पर नज़र रखी। जहाँ भी उन्हें देखा, वह अपनी दिशा बदल लेता। इस तरह वह सुरक्षित रूप से अपने देश पहुँच गया। पक्षी ने सीखा कि दयालुता के साथ-साथ बुद्धि का होना भी बहुत ज़रूरी है।
Moral
दयालुता और बुद्धिमानी मिलकर बड़ी से बड़ी मुश्किल को हल कर सकती हैं।