एक सुंदर और हरे-भरे जंगल में मिठुन नाम का एक छोटा खरगोश रहता था। मिठुन बहुत मिलनसार था और उसे अपने जंगल के दोस्तों के साथ समय बिताना बहुत पसंद था। हिरण, बंदर और भालू जैसे कई दोस्तों के साथ खेलना ही उसका जीवन था।
एक सुबह, जंगल की शांति भंग हो गई। कुछ शिकारी अपने शिकारी कुत्तों के साथ जंगल में घुस आए। वे कुत्ते जंगल के जानवरों को डराकर पकड़ने के लिए दौड़ने लगे। अचानक, एक शिकारी कुत्ते की नज़र मिठुन पर पड़ी और वह ज़ोर से भौंकते हुए मिठुन की ओर दौड़ने लगा।
मिठुन बुरी तरह डर गया। वह सबसे पहले अपने दोस्त हिरण के पास भागा। "दोस्त, बचाओ! शिकारी कुत्ते मुझे पकड़ने आ रहे हैं, मुझे कहीं छुपा दो!” मिठुन ने गिड़गिड़ाते हुए कहा। लेकिन हिरण डर के मारे बोला, "मैं तुम्हारी मदद नहीं कर सकता, मुझे अपनी जान बचानी है,” और वहाँ से भाग गया।
फिर मिठुन पेड़ पर बैठे बंदर के पास गया। "बंदर भाई, कृपया मुझे अपनी गोद में लेकर पेड़ पर चढ़ा लो!” उसने विनती की। बंदर ने घबराते हुए कहा, "माफ़ करना मिठुन, मुझे बहुत डर लग रहा है, मैं तुम्हारी मदद नहीं कर पाऊंगा,” और पेड़ की ऊँची टहनियों में छिप गया।
अंत में, मिठुन एक बड़े भालू के पास पहुँचा। भालू ने सिर हिलाते हुए कहा, "मैं बहुत बड़ा हूँ, लेकिन मुझे भी उन कुत्तों से डर लग रहा है। मैं तुम्हारी मदद नहीं कर सकता,” और झाड़ियों में छिप गया।
मिठुन बहुत अकेला और दुखी महसूस कर रहा था। उसे समझ आ गया कि मुसीबत के समय केवल दोस्त ही काम नहीं आते। उसने खुद से कहा, "अपनी सुरक्षा की ज़िम्मेदारी मेरी खुद की है।”
जैसे ही शिकारी कुत्ते पास आए, मिठुन घबराया नहीं। उसने पास ही एक घनी और कँटीली झाड़ी देखी। वह चुपके से झाड़ी के बिल्कुल बीच में घुस गया और पत्थर की तरह स्थिर बैठ गया। उसने अपनी साँसें भी रोक लीं। कुत्ते झाड़ी के पास आए, सूँघते हुए वहाँ घूमे, लेकिन मिठुन बिल्कुल नहीं हिला, इसलिए वे उसे ढूँढ नहीं पाए। कुछ देर बाद कुत्ते थककर दूसरे रास्ते चले गए।
उस दिन के बाद, मिठुन अपने दोस्तों के साथ खेलता तो था, लेकिन उसने यह सीख लिया था कि संकट के समय खुद पर भरोसा करना और अपनी बुद्धि का उपयोग करना ही सबसे बड़ा बचाव है।
Moral
मुसीबत के समय स्वयं पर भरोसा करना ही सबसे बड़ी शक्ति है।