बहुत समय पहले की बात है, एक राजा था जिसे पशु-पक्षियों से बहुत लगाव था। अपने इस शौक को पूरा करने के लिए उसने अपने महल के पास ही एक बहुत बड़ा पक्षी-घर बनवाया। उसने दुनिया के कोने-कोने से सुंदर और दुर्लभ पक्षियों को पकड़कर अपने बगीचे के पिंजरों में कैद कर लिया था।
एक शाम, जब राजा पक्षी-घर के पास टहल रहा था, उसने एक नीले रंग के पक्षी और उसके छोटे बच्चे की बातचीत सुनी।
"माँ, हमारे पंख इतने लंबे क्यों होते हैं?" नन्हे पक्षी ने उत्सुकता से पूछा।
माँ पक्षी ने प्यार से जवाब दिया, "बेटा, ये लंबे पंख हमें घने जंगलों और ऊँचे पहाड़ों के बीच बिना थके आसानी से उड़ने में मदद करते हैं।"
"और हमारे पंजे इतने मजबूत क्यों होते हैं?" बच्चे ने फिर पूछा।
"ये हमें पेड़ों की टहनियों को मजबूती से पकड़ने और ज़मीन पर चलते समय संतुलन बनाए रखने में मदद करते हैं," माँ ने समझाया।
फिर नन्हे पक्षी ने उदास होकर पूछा, "माँ, अगर हमें आसमान में उड़ने और जंगलों में रहने के लिए ये सब मिला है, तो हम इस छोटे से पिंजरे में क्यों बंद हैं? इन दीवारों के पीछे हमारा क्या काम?"
राजा यह सुनकर स्तब्ध रह गया। उसे अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने अपनी खुशी के लिए इन बेज़ुबान पक्षियों की आज़ादी छीन ली थी। उसे अपनी स्वार्थता पर बहुत पछतावा हुआ।
अगली सुबह ही राजा ने एक बड़ा फैसला लिया। उसने पक्षी-घर के सभी पिंजरे खुलवा दिए और सभी पक्षियों को उनके असली घर यानी जंगलों और पहाड़ों में वापस भेज दिया। पक्षियों को आज़ाद होते देख राजा का मन शांति और खुशी से भर गया।
Moral
जीवों की स्वतंत्रता ही उनका असली सुख है।