एक बहुत बड़ा और हरा-भरा जंगल था। वहाँ कई जानवर और पक्षी मिल-जुलकर रहते थे। लेकिन धीरे-धीरे जानवर बहुत शरारती और आक्रामक हो गए और पक्षियों को परेशान करने लगे। इससे परेशान होकर सभी पक्षियों ने एक साथ मिलकर मुकाबला करने का फैसला किया।
पक्षियों के नेता ने कहा, "अगर हम सब एक साथ मिलकर रहेंगे, तभी हम सुरक्षित रह पाएंगे।" तभी वहाँ एक चमगादड़ आया। उसने चालाकी से कहा, "मैं पक्षियों की तरह दिखता हूँ, लेकिन मेरा स्वभाव जानवरों जैसा है। इसलिए मैं किसी का साथ नहीं दूँगा।"
जल्द ही जानवरों और पक्षियों के बीच लड़ाई होने वाली थी, लेकिन जंगल के राजा शेर ने एक नेक विचार दिया। उसने कहा, "लड़ने से क्या फायदा? क्यों न हम सब मिलकर शांति से रहें?" पक्षी और जानवर मान गए और वे गहरे दोस्त बन गए। पूरे जंगल में खुशियाँ छा गईं।
जब सब मिलकर जश्न मना रहे थे, तब चमगादड़ वहाँ आया और बोला, "अब तो सब दोस्त हैं, क्या मैं भी शामिल हो सकता हूँ?" पक्षियों ने उसे मना कर दिया। वह भागकर जानवरों के पास गया, पर जानवरों ने भी उसे स्वीकार नहीं किया। वह अपनी चालाकी के कारण जंगल में बिल्कुल अकेला रह गया।
Moral
जो लोग वफादार नहीं होते, अंत में उन्हें कोई भी अपना नहीं मानता।