एक सुनहरी सुबह, राजकुमार विक्रम अपने सबसे बेहतरीन रेशमी वस्त्र पहनकर प्रजा से मिलने के लिए तैयार हुए। उनके कपड़े सूरज की रोशनी में चमक रहे थे। वे अपने घोड़े पर सवार होकर घने जंगल के रास्ते जा रहे थे।
अचानक, झाड़ियों के पीछे से एक धीमी सी कराहने की आवाज़ आई। विक्रम ने अपने घोड़े को रोका और देखा कि एक छोटा सा खरगोश कीचड़ से भरे एक गहरे गड्ढे में फँसा हुआ है। वह नन्हा जीव डर के मारे काँप रहा था और बाहर निकलने की कोशिश में नाकाम था।
एक पल के लिए विक्रम हिचकिचाए। उन्होंने अपने कीमती कपड़ों को देखा और सोचा, 'अगर मैं नीचे गया, तो मेरे ये सुंदर वस्त्र खराब हो जाएंगे।' लेकिन उस मासूम जीव की बेबसी देखकर उनका दिल पसीज गया। उन्होंने सोचा, 'इन कपड़ों से कहीं ज्यादा कीमती एक जान बचाना है।'
बिना देर किए, वे उस कीचड़ भरे गड्ढे में उतर गए। उन्होंने बहुत सावधानी से उस नन्हे खरगोश को अपनी गोद में उठा लिया। जब वे बाहर निकले, तो उनके रेशमी वस्त्र कीचड़ से पूरी तरह सन चुके थे। खरगोश तो सुरक्षित था, लेकिन राजकुमार का रूप बिगड़ चुका था।
विक्रम उसी अवस्था में सभा स्थल पर पहुँचे। उनके कीचड़ भरे कपड़ों को देखकर लोग आपस में कानाफूसी करने लगे। कुछ लोग उन्हें देखकर मुस्कुराए भी। विक्रम ने शांत रहकर सबको उस खरगोश की कहानी सुनाई।
उनकी बात सुनकर वहाँ सन्नाटा छा गया। फिर धीरे-धीरे, सभी लोग खड़े हो गए और तालियाँ बजाने लगे। उन्होंने महसूस किया कि कपड़ों पर लगा कीचड़ गंदगी नहीं, बल्कि दयालुता का पदक है। उन्होंने कपड़ों के लिए नहीं, बल्कि राजकुमार के बड़े दिल के लिए उनका सम्मान किया।
Moral
दूसरों की मदद करने से जो खुशी मिलती है, वही असली महानता है।