एक शांत गाँव में सोमू नाम का एक किसान रहता था। वह अपने खेतों में बहुत मेहनत करता और अनाज इकट्ठा करके रखता था। लेकिन एक दिन उसने देखा कि चूहों की एक टोली उसके कीमती अनाज को कुतर रही है। यह देखकर वह बहुत दुखी हुआ।
अपने अनाज को बचाने के लिए, सोमू अपने घर में एक बड़ी काली बिल्ली ले आया। वह बिल्ली बहुत फुर्तीली थी। उसके आते ही चूहे डरकर अंधेरे कोनों में छिपने लगे। चूहे हमेशा डरे रहते थे क्योंकि उन्हें पता नहीं चलता था कि बिल्ली कब हमला करेगी।
चूहों ने एक गुप्त सभा बुलाई। "समस्या यह है कि हमें पता ही नहीं चलता कि बिल्ली कब आ रही है," एक बूढ़े चूहे ने कहा। "अगर हम बिल्ली के गले में एक छोटी घंटी बाँध दें, तो उसकी आवाज़ सुनकर हम समय रहते छिप सकते हैं!"
लेकिन बिल्ली के पास जाकर घंटी बाँधना बहुत खतरनाक था। कौन इतना साहसी होगा? तभी चिन्नू नाम का एक छोटा और बहादुर चूहा आगे आया। "मैं यह करूँगा!" चिन्नू ने साहस के साथ कहा।
एक दोपहर, जब बिल्ली गहरी नींद में सो रही थी, चिन्नू धीरे से उसके पास गया। उसने बहुत सावधानी से एक रेशमी धागे की मदद से बिल्ली के गले में एक छोटी सी घंटी बाँध दी। बिल्ली के जागने से पहले ही चिन्नू तेजी से अपने बिल में वापस आ गया। सभी चूहे खुशी से झूम उठे।
लेकिन, यह योजना उल्टी पड़ गई। जब भी बिल्ली चूहों को पकड़ने के लिए दबे पाँव आती, घंटी 'टिन-टिन' बजने लगती। घंटी की आवाज़ सुनते ही सभी चूहे तुरंत अपने बिलों में छिप जाते। बिल्ली इतनी तेज़ होने के बावजूद एक भी चूहा नहीं पकड़ पाई। अंत में, सोमू ने देखा कि बिल्ली अब कोई मदद नहीं कर रही है, तो उसने उसे घर से बाहर भेज दिया।
कहानी की सीख
किसी भी मदद या वस्तु को उसके परिणामों के बारे में सोचे बिना स्वीकार नहीं करना चाहिए।