एक घने जंगल के किनारे एक विशाल बरगद का पेड़ था। उस पेड़ के नीचे कबील नाम का एक कछुआ रहता था। कबील को अपने मजबूत और सख्त कवच पर बहुत गर्व था। उसे लगता था कि वह जंगल का सबसे सुरक्षित जीव है।
एक दोपहर, जब कबील आराम कर रहा था, उसने देखा कि ऊपर एक छोटी चिड़िया, चिट्टू, तिनकों और पत्तों से एक घोंसला बना रही है। कबील ने ऊपर देखते हुए पूछा, "ए चिट्टू! तुम इतनी मेहनत करके यह कमजोर सा घोंसला क्यों बना रही हो?"
चिट्टू ने शांति से जवाब दिया, "कबील भाई, जल्द ही मेरे अंडे फूटेंगे और नन्हे बच्चे बाहर आएंगे। उन्हें सुरक्षित रहने के लिए इस घर की जरूरत है।"
यह सुनकर कबील जोर से हँसा। "कितना बेकार घोंसला है! एक हल्की हवा भी इसे उड़ा ले जाएगी। मेरा कवच देखो, यह एक किले की तरह मजबूत है। कोई इसे तोड़ नहीं सकता। तुम इस कमजोर घर में क्यों रहना चाहती हो?"
चिट्टू मुस्कुराई और बोली, "आपका कवच मजबूत है, यह सच है। लेकिन आपके घर में कोई आ नहीं सकता। मेरा घोंसला छोटा है, लेकिन यहाँ मेरे दोस्त और रिश्तेदार आते हैं और खुशी से बातें करते हैं। जहाँ प्यार और साथ होता है, वही असली घर है।"
कबील चुप हो गया। उसे एहसास हुआ कि उसका मजबूत कवच उसे सुरक्षा तो देता है, लेकिन उसे अकेला भी कर देता है।
Moral
प्यार और अपनों से भरे छोटे घर, अकेलेपन वाले बड़े महल से कहीं बेहतर हैं।