एक सुंदर गाँव के किनारे सोमू नाम का एक किसान रहता था। उसके पास तेल निकालने वाली एक बड़ी चक्की थी। उस चक्की को चलाने के लिए उसके पास मणि नाम का एक गधा था। मणि रोज़ सुबह से शाम तक उस चक्की के चारों ओर घूमता रहता था। यह काम बहुत थका देने वाला था।
एक दोपहर, जब मणि एक आम के पेड़ की छाया में आराम कर रहा था, तभी चिन्नू नाम के एक शरारती बंदर ने उसे देखा। चिन्नू बहुत चालाक था लेकिन बहुत आलसी भी था। उसने सोचा, "यह गधा कितना मूर्ख है! रोज़ एक ही जगह चक्कर काटता रहता है। अगर मैं इसे बेवकूफ बना लूँ, तो मैं बिना चले लंबी यात्रा कर सकता हूँ!"
ya चिन्नू धीरे से मणि के पास आया और बोला, "अरे मणि भाई! तुम अपनी ज़िंदगी इस छोटे से घेरे में क्यों बर्बाद कर रहे हो? चलो मेरे साथ! इस जंगल के पार ऊँचे पहाड़ हैं, जहाँ बहुत सारे मीठे फल और सुंदर नज़ारे हैं। हम वहाँ राजाओं की तरह रहेंगे!"
मणि को लगा कि शायद सच में कोई बेहतर जीवन मिल सकता है। उसने चिन्नू की बात मान ली। चिन्नू मणि की पीठ पर सवार हो गया और यात्रा शुरू हुई। रात होने पर चिन्नू को नींद आने लगी। उसने मणि को यह विश्वास दिलाने की योजना बनाई कि वे बहुत दूर आ गए हैं ताकि मणि और न चले।
चिन्नू ने झूठ बोलते हुए कहा, "मणि, घबराओ मत! हमने जंगल पार कर लिया है और अब हम पहाड़ों के बहुत करीब हैं। चलो, आज रात यहीं आराम करते हैं।" चिन्नू मणि की पीठ पर ही सो गया। लेकिन असल में, मणि पूरी रात उसी चक्की के चारों ओर एक बड़े घेरे में घूमता रहा।
अगली सुबह जब सूरज निकला, तो चिन्नू की आँखें खुलीं और वह हैरान रह गया! वह किसी पहाड़ पर नहीं, बल्कि उसी आम के बगीचे में था! चिन्नू ने सोचा कि उसने मणि को बेवकूफ बना दिया, लेकिन सच तो यह था कि वे एक इंच भी आगे नहीं बढ़े थे।
तभी सोमू किसान वहाँ आया। उसने बंदर की चालाकी देख ली थी। उसने चिन्नू को वहाँ से भगा दिया। मणि को बहुत दुख हुआ कि उसने एक गलत दोस्त पर भरोसा किया। चिन्नू को समझ आ गया कि दूसरों को धोखा देकर कभी खुशी नहीं मिलती।
Moral
गलत सलाह मानने से आप वहीं रह जाते हैं जहाँ से आपने शुरुआत की थी।