एक घने जंगल में शेरू नाम का एक सुनहरी धारियों वाला बाघ और कालू नाम का एक काला तेंदुआ रहता था। शेरू को अपनी चमकदार खाल पर बहुत घमंड था। वह अक्सर कालू का मज़ाक उड़ाते हुए कहता, 'देखो कालू, मेरी धारियाँ सूरज की तरह चमकती हैं! लेकिन तुम तो बिल्कुल अंधेरे की तरह काले हो, तुममें कोई सुंदरता नहीं है।' कालू उसकी बातें सुनकर बस मुस्कुरा देता था।
एक दिन जंगल में शिकारियों का आगमन हुआ। वे जानवरों को पकड़ने के लिए जाल और पिंजरे लाए थे। अचानक, शेरू के छोटे बच्चे शिकारियों के जाल में फँस गए। शेरू उन्हें बचाने के लिए दौड़ा, लेकिन उसके चमकीले नारंगी रंग के कारण शिकारी उसे तुरंत देख पाए और उन्होंने उसे रोक दिया।
यह देखकर कालू ने मदद करने का फैसला किया। कालू का गहरा काला रंग उसे जंगल की छाया में छिपने में मदद कर रहा था। वह बिना कोई आहट किए शिकारियों के पास पहुँच गया। शिकारियों ने उसे देखा तक नहीं। अचानक कालू ने उन पर हमला कर उन्हें डरा दिया, जिससे शिकारी डरकर भाग गए। इस अफरा-तफरी में बच्चों को भी आज़ाद कराया गया।
शेरू को एहसास हुआ कि जिस रंग पर उसे इतना गर्व था, उसी ने उसे खतरे में डाल दिया। कालू के काले रंग ने ही सबकी जान बचाई। शेरू ने कालू से माफी माँगी और उस दिन से वे पक्के दोस्त बन गए।
Moral
बाहरी दिखावे से अधिक उपयोगिता और स्वभाव महत्वपूर्ण है।