एक घने जंगल में बालू नाम का एक भालू रहता था। अन्य भालुओं से अलग, बालू को एक बहुत ही अनोखी आदत थी—उसे किताबें पढ़ना बहुत पसंद था। वह अक्सर एक बड़े बरगद के पेड़ के नीचे बैठकर पुरानी किताबें पढ़ा करता था। जंगल के अन्य जानवर उसका मज़ाक उड़ाते थे। "बालू, तुम एक भालू हो! तुम्हें शहद ढूँढना चाहिए या मछली पकड़नी चाहिए, इन कागज़ के टुकड़ों को देखकर क्या करोगे?" बंदर और हिरण उसे देखकर हँसते थे।
बालू उनकी बातों पर ध्यान नहीं देता था। एक दोपहर, जंगल की शांति को भंग करते हुए एक अजीब सी आवाज़ आई। 'ट्रिंग... ट्रिंग...' की तेज़ आवाज़ पूरे जंगल में गूँज उठी। झाड़ियों के बीच एक चमकती हुई काली चीज़ गिरी हुई थी। वह आवाज़ सुनकर खरगोश और हिरण डर के मारे कांपने लगे। "यह कोई जादुई पत्थर है! यह हमें डरा रहा है!" एक बंदर चिल्लाया।
जब सभी जानवर डरकर भागने लगे, तब एक छोटा हिरण बालू के पास दौड़कर आया। "बालू भैया, यह क्या है? यह इतनी तेज़ आवाज़ क्यों कर रहा है? क्या यह कोई राक्षस है?" अन्य जानवर भी बालू के पास जमा हो गए और डरते हुए बोले, "तुम्हें तो सब पता है, कृपया हमें बताओ कि यह क्या है, क्या यह खतरनाक है?"
बालू शांति से उस वस्तु के पास गया। उसने अपनी पढ़ी हुई किताबों से इसे तुरंत पहचान लिया। वह एक मोबाइल फोन था। बालू मुस्कुराया और बोला, "दोस्तों, डरो मत! मैंने अपनी किताबों में इसके बारे में पढ़ा है। यह मनुष्यों द्वारा बातचीत करने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक यंत्र है। यह हमें नुकसान नहीं पहुँचाएगा। लेकिन आप लोग इससे इसलिए डर रहे हैं क्योंकि आप इसके बारे में नहीं जानते। यदि आप किताबें पढ़ते, तो यह आपके लिए कोई रहस्य नहीं होता।"
जानवरों को अपनी गलती का एहसास हुआ। बालू ने आगे कहा, "ज्ञान एक बहुत बड़ी शक्ति है। आज आप इस छोटी सी चीज़ से डर गए। कल अगर कोई बड़ी मुसीबत आती है, तो आप समझ नहीं पाएंगे कि क्या करना है। इसलिए केवल खेलने के बजाय, नई चीज़ें सीखना शुरू करें।"
उस दिन के बाद से, जंगल के जानवरों ने बालू का मज़ाक उड़ाना बंद कर दिया और उसके साथ बैठकर नई चीज़ें सीखने लगे।
Moral
ज्ञान वह ढाल है जो हमें डर और अनजाने खतरों से बचाती है।