पहाड़ों के पास एक छोटे से गाँव में कविन नाम का एक लड़का अपनी माँ के साथ रहता था। वे बहुत गरीब थे और अपने छोटे से बगीचे की सब्जियाँ बेचकर अपना गुजारा करते थे। एक दिन, सोमू नाम का एक रिश्तेदार कविन को एक विशेष काम के लिए अपने साथ ले गया।
वे घने जंगल के बीच एक रहस्यमयी गुफा के पास पहुँचे। "कविन, इस गुफा के अंदर बहुत सारे रत्न हैं, लेकिन मैं अंदर नहीं जा सकता। तुम अंदर जाओ और उन्हें मेरे लिए लेकर आओ," सोमू ने कहा। कविन डर गया, लेकिन सोमू ने उसे एक जादुई अंगूठी दी और कहा, "यह तुम्हारी रक्षा करेगी।"
कविन गुफा के अंदर गया और चमकते हुए रत्नों को इकट्ठा करके सोमू को दे दिया। जब कविन ने बाहर आने के लिए कहा, तो सोमू के मन में लालच आ गया। "अगर राजा को इन रत्नों का पता चला, तो वह सब छीन लेगा। इसलिए तुम्हें यहीं रुकना होगा!" सोमू ने गुफा का रास्ता बंद कर दिया और कविन को अंदर ही छोड़ दिया।
अंधेरे में बैठे हुए कविन को ज़मीन पर एक पुराना तांबे का चिराग मिला। जैसे ही उसने उसे साफ किया, एक विशाल जिन्न प्रकट हुआ। "डरो मत दोस्त! मैं इस चिराग का रखवाला हूँ। तुम्हें क्या चाहिए?" जिन्न ने पूछा। कविन ने अपने घर जाने की इच्छा जताई। जिन्न ने एक मंत्र पढ़ा और कविन पलक झपकते ही अपने घर पहुँच गया।
कविन ने अपनी माँ को सब बताया। माँ पहले तो विश्वास नहीं कर पाईं, लेकिन जब कविन ने चिराग दिखाया, तो वे दंग रह गईं। जिन्न ने उन्हें ढेर सारा भोजन और चाँदी के बर्तन दिए। कविन ने उन्हें बेचकर अपनी गरीबी दूर कर ली। बाद में, कविन ने ईमानदारी से राजा को गुफा के बारे में बताया। राजा ने उसकी सच्चाई की सराहना की और उसे बहुत सारे पुरस्कार दिए।
लेकिन लालची सोमू ने मौका देखकर राजकुमारी का अपहरण कर लिया और जादुई चिराग भी चुरा लिया। कविन बहुत दुखी हुआ, लेकिन उसने पहले ही राजकुमारी को चिराग का रहस्य नहीं बताया था। जैसे ही राजकुमारी ने चिराग को छुआ, जिन्न प्रकट हुआ। जिन्न ने सोमू को पकड़कर जेल में डाल दिया और कविन को राजकुमारी के साथ खुशी-खुशी रहने दिया।