एक साफ़ और नीले पानी के तालाब में मिन्नू नाम की एक छोटी मछली रहती थी। मिन्नू को ठंडे पानी में तैरना बहुत पसंद था। एक दोपहर, तालाब के किनारे लगे एक बड़े बरगद के पेड़ से एक आवाज़ आई।
पेड़ की टहनी पर कपील नाम का एक बंदर बैठा था। उसने मज़ाक में पूछा, "अरे मछली! पानी कैसा है?"
मिन्नू ने ऊपर देखते हुए कहा, "पानी बहुत ठंडा और प्यारा है!"
कपील ने गर्व से कहा, "तुम इस पेड़ की सबसे ऊँची चोटी पर आकर देखो! वहाँ से पूरी दुनिया बहुत सुंदर दिखती है!"
यह सुनकर मिन्नू उदास हो गई। उसने धीरे से कहा, "कपील, मैं पेड़ पर नहीं चढ़ सकती। मैं तो पानी के लिए बनी हूँ।"
कपील ज़ोर से हँसा, "हा हा! तुम्हें पेड़ पर चढ़ना नहीं आता? यह तो बहुत अजीब बात है!" और वह दूसरी टहनी पर कूद गया।
मिन्नू को बहुत बुरा लगा। उसे लगा कि वह बहुत कमज़ोर है क्योंकि वह बंदर की तरह पेड़ पर नहीं चढ़ सकती। वह सारा दिन उदास बैठी रही।
तभी एक समझदार बूढ़ी मछली उसके पास आई और पूछा, "नन्ही मिन्नू, तुम इतनी उदास क्यों हो?"
मिन्नू ने सारी बात बता दी। बूढ़ी मछली ने प्यार से समझाया, "मिन्नू, उदास मत हो। ईश्वर ने हर किसी को एक अलग हुनर दिया है। तुम्हें तैरना आता है, इसीलिए तुम पानी में खुशी से रह सकती हो। तुम्हें पेड़ पर चढ़ने की ज़रूरत नहीं है।
ज़रा कपील को देखो, उसे पेड़ पर चढ़ना आता है, पर क्या उसे तुम्हारी तरह पानी में तैरना आता है? नहीं! हर किसी की अपनी जगह और अपनी ताकत होती है।"
कुछ दिनों बाद, तेज़ बारिश के कारण कपील का संतुलन बिगड़ गया और वह सीधे तालाब में गिर गया! कपील को तैरना नहीं आता था, इसलिए वह घबराकर हाथ-पैर मारने लगा। मिन्नू और उसकी सहेलियों ने मिलकर कपील को किनारे तक पहुँचने में मदद की।
तब मिन्नू को समझ आया कि हर किसी की अपनी एक खास काबिलियत होती है और हमें उस पर गर्व करना चाहिए।
Moral
अपनी तुलना दूसरों से न करें, बल्कि अपनी विशिष्ट क्षमताओं को पहचानें और उनका सम्मान करें।