एक सुंदर हरे-भरे जंगल में तीन खरगोश भाई रहते थे। वे एक ही बिल में रहते थे, लेकिन उनमें से कोई किसी से बात नहीं करता था। सबसे बड़ा खरगोश, मिठुन, हमेशा एक पुराने रेडियो को सुनने में व्यस्त रहता था। दूसरा खरगोश, सोमू, दिन भर एक छोटी लकड़ी के टुकड़े से खेलता रहता था, और सबसे छोटी खरगोश, चिट्टी, एक चमकते हुए पत्थर को हाथ में लेकर निहारती रहती थी।
उनके पिता खरगोश यह सब देखकर बहुत दुखी थे। वे देख रहे थे कि उनके बच्चे जंगल की खूबसूरती और आपस में प्यार करना भूलते जा रहे हैं। उन्हें सुधारने के लिए उन्होंने एक योजना बनाई।
एक शाम, पिता ने तीनों को बुलाया। "बच्चों," उन्होंने गंभीरता से कहा, "कल से हम एक नया खेल खेलेंगे। आप में से प्रत्येक को एक छोटी लकड़ी की तख्ती लेनी होगी। हर शाम, आपको उस पर लिखना होगा कि आपने कितना समय उपयोगी काम करने में बिताया और कितना समय खाली बैठने में बिताया। जो भी सबसे ज्यादा समय खाली बैठेगा, उसे यह घर छोड़कर कहीं और जाना होगा।"
यह सुनकर तीनों खरगोश डर गए। अगले दिन से वे अपनी-अपनी तख्तियाँ लेकर बैठ गए। लेकिन काम करने के बजाय, वे एक-दूसरे पर आरोप लगाने लगे। मिठुन ने कहा, "मैं रेडियो इसलिए सुनता हूँ क्योंकि सोमू हमेशा अपनी लकड़ी से शोर मचाता रहता है!" सोमू ने तर्क दिया, "मैं इसलिए खेलता हूँ क्योंकि मिठुन बहुत उबाऊ है और चिट्टी बस उस पत्थर को देखती रहती है!" चिट्टी रोते हुए बोली, "मेरे भाई ही सारा समय बर्बाद करते हैं!"
पिता ने यह सब सुन लिया। उन्होंने कहा, "दूसरों पर उंगली उठाने से आपकी तख्तियाँ नहीं बदलेंगी। यदि आप काम करने के बजाय एक-दूसरे को दोष देंगे, तो आप तीनों को सजा मिलेगी।"
तभी उन्हें एक बड़ी बात समझ आई। उन्हें एहसास हुआ कि दूसरों की गलतियाँ निकालने से वे खुद बेहतर नहीं बन पाएंगे। उन्होंने एक-दूसरे को दोष देना बंद कर दिया। मिठुन ने जंगल के पक्षियों के लिए गाजर इकट्ठा करना शुरू कर दिया। सोमू ने तेजी से दौड़ने का अभ्यास किया। चिट्टी ने जंगल के अच्छे फल पहचानना सीखा।
कुछ दिनों बाद, उनकी तख्तियों पर 'उपयोगी समय' बढ़ गया और 'खाली समय' कम हो गया। अब वे एक खुशहाल परिवार की तरह रहते थे। उन्होंने दूसरों की कमियाँ निकालने के बजाय खुद को बेहतर बनाने पर ध्यान दिया।
Moral
दूसरों की कमियाँ निकालने के बजाय, खुद को बेहतर बनाने पर ध्यान दें।