एक समय की बात है, एक राजा था जिसे आसमान की ऊंचाइयों से बहुत लगाव था। उसे उन बाज पक्षियों पर बहुत गर्व था जो संदेशवाहक के रूप में एक राज्य से दूसरे राज्य तक खबरें पहुँचाते थे।
एक दिन, पड़ोसी देश के राजा ने उपहार स्वरूप दो सुंदर सलेटी रंग के बाज भेंट किए। राजा ने उन्हें एक कुशल प्रशिक्षक को सौंप दिया और आदेश दिया कि उन्हें ऊँचा उड़ने का प्रशिक्षण दिया जाए।
कुछ हफ्तों बाद, राजा उनका हाल देखने आए। पहला बाज बहुत ही शानदार था; वह तेज हवाओं और बादलों के बीच भी बहुत ऊँचाई पर उड़ रहा था। राजा बहुत खुश हुए और उन्होंने प्रशिक्षक को सोने के सिक्के इनाम में दिए।
लेकिन दूसरा बाज एक मोटी पेड़ की टहनी पर चुपचाप बैठा रहा। वह हिलने तक को तैयार नहीं था। यह देखकर राजा को बहुत गुस्सा आया। "यह पक्षी इतना आलसी क्यों है? क्या प्रशिक्षक इसे सही से नहीं सिखा रहा?" राजा ने चिल्लाकर पूछा।
तभी एक वृद्ध और बुद्धिमान प्रशिक्षक आगे आया। उसने कहा, "महाराज, आप चिंता न करें। मैं इस बाज को उड़ना सिखा दूँगा।"
कुछ दिनों बाद जब राजा फिर से आए, तो वे दंग रह गए! वह दूसरा बाज अब आसमान में बहुत ही खूबसूरती से चक्कर काट रहा था। राजा ने हैरानी से पूछा, "यह कैसे संभव हुआ? यह तो हिल भी नहीं रहा था!"
बुद्धिमान प्रशिक्षक मुस्कुराया और बोला, "महाराज, वह बाज उस टहनी पर इसलिए बैठा था क्योंकि उसे लगता था कि टहनी ही उसका सहारा है। वह अपनी शक्ति के बजाय टहनी पर निर्भर था। मैंने बस उस टहनी को हटा दिया। जब टहनी का सहारा नहीं रहा, तो उसके पास बचने के लिए अपने पंखों का उपयोग करने के अलावा कोई रास्ता नहीं था। तभी उसे अपनी असली ताकत का एहसास हुआ।"
राजा प्रशिक्षक की समझदारी देखकर बहुत प्रसन्न हुए।
Moral
जब हम दूसरों के सहारे के बजाय अपनी क्षमताओं पर भरोसा करते हैं, तभी हम असली सफलता पाते हैं।