एक घने जंगल में, एक साफ और सुंदर नदी बहती थी, जो जंगल के सभी जानवरों के लिए जीवन का आधार थी। एक दिन, हाथियों का एक बड़ा झुंड उस नदी के पास आया। हाथी बहुत खुश थे और मस्ती कर रहे थे। वे नदी के बीच में घुस गए और अपने भारी पैरों से मिट्टी को खोदने लगे, जिससे साफ पानी पूरी तरह से गंदा और कीचड़ भरा हो गया।
नदी के किनारे चींटियों का एक छोटा सा घर था। चींटियों की रानी ने हाथियों के पास जाकर विनम्रता से कहा, "बड़े दोस्तों, कृपया सावधानी से रहें। यह नदी जंगल के सभी जानवरों की है। अगर आप इसे ऐसे ही गंदा करेंगे, तो बाकी जानवर साफ पानी कैसे पिएंगे?"
हाथी उन छोटी चींटियों पर हंसने लगे। "तुम इतनी छोटी हो, तुम हमें क्या सिखाओगी?" कहकर वे मस्ती करने लगे।
अगले दिन, जब हाथी प्यासे होकर नदी पर आए, तो चींटियों ने एक योजना बनाई। उन्होंने छोटी पत्तियों को नाव की तरह इस्तेमाल किया और नदी में तैरते हुए हाथियों के पास पहुँचे। जैसे ही हाथियों ने पानी पीने के लिए अपनी सूंड नदी में डाली, चींटियाँ चुपके से उनकी सूंड के अंदर घुस गईं और उन्हें काटने लगीं।
दर्द के मारे हाथी चिल्लाने लगे। वे अपनी सूंड झटकते रहे, लेकिन दर्द कम नहीं हुआ। तब हाथियों को समझ आया कि उन्होंने छोटी चींटियों को कम करके बड़ी गलती की थी। उन्होंने चींटियों से माफी मांगी और वादा किया कि वे भविष्य में नदी को गंदा नहीं करेंगे।
Moral
कभी भी किसी को उसके आकार से कमतर न आंकें; छोटे जीव भी बड़ा सबक सिखा सकते हैं।