अर्जुन एक बहुत ही शर्मीला लड़का था। उसे हमेशा लगता था कि वह किसी भी काम में अच्छा नहीं है। जब भी उसे कुछ नया करने या किसी से बात करने की ज़रूरत होती, तो उसके मन में एक डर बैठ जाता था— "मुझसे नहीं होगा।"
एक दिन उसके पिता उसे चिड़ियाघर ले गए। वहाँ उसने एक विशालकाय हाथी देखा। अर्जुन यह देखकर हैरान रह गया कि इतने बड़े हाथी को रोकने के लिए केवल एक पतली सी रस्सी का इस्तेमाल किया जा रहा था।
उसने अपने पिता से पूछा, "पापा, देखिए! वह हाथी कितना बड़ा है! उसे रोकने के लिए कोई भारी ज़ंजीर क्यों नहीं है? यह छोटी सी रस्सी तो पल भर में टूट जाएगी!"
पास खड़े एक गार्ड ने उनकी बात सुन ली और मुस्कुराते हुए कहा, "बेटा, यह हाथी जब छोटा था, तब भी इसे इसी तरह की पतली रस्सी से बांधा जाता था। उस समय यह छोटा हाथी इतना शक्तिशाली नहीं था कि रस्सी तोड़ सके। उसने कई बार कोशिश की और हर बार असफल रहा।"
गार्ड ने आगे कहा, "उस असफलता ने उसके मन में यह बात बिठा दी कि वह इस रस्सी को कभी नहीं तोड़ पाएगा। आज वह बहुत शक्तिशाली हो गया है, वह एक झटके में इस रस्सी को तोड़ सकता है, लेकिन वह कोशिश ही नहीं करता क्योंकि उसे लगता है कि वह हार जाएगा।"
अर्जुन चुपचाप हाथी को देखता रहा। उसे समझ आ गया कि हाथी रस्सी से नहीं, बल्कि अपनी पुरानी हार के डर से बंधा हुआ है। उसे एहसास हुआ कि वह भी अपने डर के कारण अपनी असली ताकत को भूल गया है। उस दिन के बाद, अर्जुन ने डरना छोड़कर कोशिश करना शुरू कर दिया।
Moral
अपनी पिछली असफलताओं को अपनी असली क्षमता की सीमा मत बनने दो।