बहुत समय पहले की बात है, एक घने जंगल में गजव नाम का एक हाथी रहता था। उस समय के हाथियों के पास आज की तरह लंबी सूंड नहीं होती थी। उन्हें पानी पीने के लिए अपना सिर बहुत नीचे झुकाना पड़ता था और केवल मुँह से ही पानी पीना पड़ता था।
एक बार जंगल में भीषण सूखा पड़ा। सभी जानवर पानी की तलाश में एक बड़े तालाब के पास जमा हुए। लेकिन उस तालाब में एक शरारती मगरमच्छ रहता था। जब भी गजव पानी पीने की कोशिश करता, मगरमच्छ पानी के अंदर से अचानक बाहर निकल आता और उसे डराने लगता। डर के मारे गजव पानी भी नहीं पी पाता था और वहाँ से भाग जाता था। अन्य जानवर जल्दी से पानी पीकर चले जाते, पर गजव को बहुत मुश्किल होती थी।
गजव बहुत उदास हो गया। उसने प्रार्थना की कि उसे इस समस्या से लड़ने की शक्ति मिले। उसी रात उसे एक सपना आया जिसमें एक दिव्य आवाज़ ने कहा, 'गजव, डरो मत। यदि तुम अपने डर का सामना करोगे, तो प्रकृति तुम्हें एक नया रूप देगी।'
अगली सुबह, गजव नए आत्मविश्वास के साथ तालाब पर गया। मगरमच्छ ने फिर से उसे डराने की कोशिश की, लेकिन इस बार गजव भागा नहीं। वह मजबूती से खड़ा रहा। जैसे ही उसने पानी की ओर अपना चेहरा बढ़ाया, एक चमत्कार हुआ! उसकी नाक लंबी होने लगी और एक शक्तिशाली सूंड में बदल गई!
अब गजव आसानी से सूंड में पानी भरकर पी सकता था। जब मगरमच्छ ने उसे फिर से परेशान करने की कोशिश की, तो गजव ने अपनी सूंड से पानी की एक तेज़ बौछार मगरमच्छ पर छोड़ दी। पानी के जोर से मगरमच्छ दूर जा गिरा। गजव की हिम्मत ने उसे एक अद्भुत उपहार दिया था। अब वह बिना किसी डर के अपनी प्यास बुझा सकता था।
Moral
साहस और दृढ़ निश्चय से हम बड़ी से बड़ी मुश्किल को हल कर सकते हैं।