एक सुंदर से फार्महाउस में मिठुन नाम का एक छोटा खरगोश रहता था। मिठुन बहुत ही मेहनती और फुर्तीला था। लेकिन उसी घर में बस्टर नाम का एक आलसी कुत्ता, लूना नाम की एक सुस्त बिल्ली और डिल्ली नाम की एक नासमझ बत्तख भी रहते थे। वे दिन भर बस सोने या खेलने में लगे रहते थे।
एक सुबह मिठुन एक छोटी सी थैली लेकर बाहर आया। "दोस्तों! मुझे गाजर के कुछ बहुत अच्छे बीज मिले हैं। चलो, हम सब मिलकर उन्हें खेत में बोते हैं!" मिठुन ने उत्साह से कहा।
बस्टर कुत्ते ने उबासी लेते हुए कहा, "मुझे बहुत नींद आ रही है, मैं नहीं आऊंगा।" लूना बिल्ली ने आलस से कहा, "मुझे काम करना पसंद नहीं है।" और डिल्ली बत्तख ने कहा, "मुझे तो खेती करना आता ही नहीं!"
मिठुन ने हार नहीं मानी। उसने अकेले ही मिट्टी खोदी, बीज बोए और हर दिन पौधों को पानी दिया। जब बाकी सब सो रहे होते थे, मिठुन कड़ी धूप में मेहनत करता था।
कुछ हफ्तों बाद, खेत में सुंदर नारंगी गाजरें उग आईं। मिठुन खुशी से चिल्लाया, "दोस्तों! गाजर निकालने का समय आ गया है! आओ और मेरी मदद करो!"
लेकिन जवाब वही था। बस्टर, लूना और डिल्ली ने फिर से बहाने बनाए और आने से मना कर दिया। मिठुन ने हार नहीं मानी। उसने अकेले ही सारी गाजरें निकालीं, उन्हें साफ किया और उनसे स्वादिष्ट गाजर का सूप और गाजर का केक बनाया।
शाम को गाजर के केक की खुशबू पूरे घर में फैल गई। मिठुन बाहर आया और बोला, "दावत तैयार है! सब लोग आकर खा सकते हैं!"
खुशबू सूंघते ही बस्टर, लूना और डिल्ली दौड़ते हुए आए। "वाह! कितनी अच्छी खुशबू है! चलो, हम सब मिलकर खाते हैं!" वे खुशी से बोले।
मिठुन धीरे से मुस्कुराया और बोला, "जब बीज बोने का समय था, तब तुम नहीं थे। जब पानी देने का समय था, तब तुम नहीं थे। और जब गाजर निकालने का समय था, तब भी तुम नहीं थे। तो अब खाने के लिए कैसे आ गए? जो मेहनत नहीं करते, उन्हें फल भी नहीं मिलता।"
मिठुन ने शांति से अपना खाना खाया। आलस की वजह से उन तीनों दोस्तों को उस दिन भूखा ही सोना पड़ा।
Moral
मेहनत करने वालों को ही सफलता का स्वाद मिलता है।