एक शांत गाँव में सोमू नाम का एक मेहनती किसान रहता था। वह दिन-रात खेतों में काम करता था, फिर भी बहुत गरीबी में जीवन बिताता था। एक दिन खेत जोतते समय उसे मिट्टी के नीचे एक पुराना मिट्टी का घड़ा मिला। उसे लगा शायद इसमें खजाना होगा, लेकिन घड़ा खाली था।
थका हुआ सोमू अपना फावड़ा उस घड़े में रखकर पास के पेड़ की छाँव में आराम करने लगा। जब वह कुछ देर बाद उठा, तो उसकी आँखें फटी की फटी रह गईं! घड़े में एक नहीं, बल्कि सौ फावड़े थे! सोमू ने इसे परखने के लिए एक आम घड़े में डाला, और देखते ही देखते घड़ा सौ आमों से भर गया।
सोमू ने उन आमों और कुछ सोने के सिक्कों को बेचकर बहुत धन कमाया और जल्द ही वह अमीर हो गया। लेकिन उसके पड़ोसी कपिला को यह देखकर बहुत जलन हुई। एक शाम कपिला ने सोमू की खिड़की से उस जादुई घड़े का चमत्कार देख लिया।
कपिला तुरंत राजा के पास गया और झूठ बोला, "महाराज! सोमू के पास एक जादुई घड़ा है जो राज्य की संपत्ति बढ़ा सकता है। ऐसा खजाना तो केवल राजा का होना चाहिए!"
लालच में आकर राजा ने सैनिकों को घड़ा लाने का आदेश दिया। जब राजा ने घड़े की शक्ति देखने के लिए उसमें झाँकने की कोशिश की, तो उसका संतुलन बिगड़ गया और वह घड़े के अंदर गिर गया। अगले ही पल, घड़े से सौ राजा बाहर निकल आए! सभी आपस में लड़ने लगे कि असली राजा कौन है।
जब सोमू को यह पता चला, तो उसने राहत की सांस ली। उसने अपनी पत्नी से कहा, "उस घड़े ने हमारी मदद की, लेकिन लालची लोगों के लिए वह केवल मुसीबत ही लाता है। अच्छा है कि वह घड़ा राजा के पास ही रहे।"
Moral
लालच बुरी बला है; जो हमारे पास है, हमें उसी में संतोष करना चाहिए।