एक घने जंगल के पास एक सुंदर तालाब था, जहाँ बहुत सारे मेंढक खुशी-खुशी रहते थे। वह तालाब जंगल के बीचों-बीच था, इसलिए वहाँ बड़े जानवर कम ही आते थे। इस वजह से मेंढकों को पता ही नहीं था कि दुनिया में कितने विशाल जीव रहते हैं।
उन मेंढकों में 'कम्बन' नाम का एक बड़ा मेंढक था। कम्बन को अपनी ताकत पर बहुत घमंड था। वह खुद को तालाब का राजा समझता था। जब भी कोई छोटा कीड़ा उसके पास आता, वह अपने गले को एक बड़े गुब्बारे की तरह फुला लेता और 'डप-डप' की आवाज़ निकालकर उन्हें डरा देता था।
एक दिन, एक विशाल हाथी उस तालाब के पास से गुज़रा। हाथी के भारी कदमों से ज़मीन हिलने लगी। यह देखकर वहाँ मौजूद कीड़े घबराकर कम्बन के पास आए और बोले, 'कम्बन! देखो, एक पहाड़ जैसा बड़ा जीव आ रहा है! अपनी ताकत दिखाने का यह सही मौका है!'
घमंड में चूर कम्बन हाथी के ठीक सामने जाकर खड़ा हो गया। हाथी के लिए वह छोटा मेंढक ज़मीन पर पड़े एक मामूली कंकड़ जैसा था। हाथी अपनी मस्ती में चलता रहा, लेकिन कम्बन को लगा कि उसे और बड़ा दिखना चाहिए। उसने अपनी पूरी ताकत लगाकर अपने शरीर में हवा भरना शुरू कर दिया।
वह 'डप... डप... डप...' की आवाज़ें निकालने लगा। वह हाथी से भी बड़ा दिखने के लिए अपने शरीर को गुब्बारे की तरह बहुत ज़्यादा फुलाने लगा। अचानक, एक ज़ोरदार आवाज़ के साथ कम्बन का शरीर फट गया। अपने अहंकार के कारण कम्बन ने अपनी जान गँवा दी।
Moral
अत्यधिक अहंकार विनाश का कारण बनता है।