एक विशाल जंगल में गज्जू नाम का एक हाथी रहता था। गज्जू को अपनी ताकत पर बहुत घमंड था। वह जंगल के अन्य जानवरों, खासकर बुजुर्ग जानवरों की बातों को अनसुना कर देता था। उसे लगता था कि वह सबसे शक्तिशाली है और उसे किसी की सलाह की ज़रूरत नहीं है।
एक शाम, आसमान में काले बादल छा गए और एक भयानक तूफान आने लगा। जंगल के सभी जानवर सुरक्षित स्थानों की तलाश में अपनी गुफाओं और पेड़ों के नीचे छिपने लगे। बुजुर्ग जानवरों ने गज्जू को चेतावनी दी, 'गज्जू, तूफान आ रहा है! जल्दी से किसी सुरक्षित जगह पर चले जाओ।' लेकिन गज्जू ने हंसकर कहा, 'मुझे क्या डरना? मैं सबसे बलवान हूँ!' और वह घूमता रहा।
तभी, अचानक एक बहुत तेज़ आवाज़ हुई। तेज़ हवा के कारण एक विशाल पेड़ जड़ से उखड़ गया और सीधे गज्जू के ऊपर आ गिरा। गज्जू का पैर उस भारी पेड़ के नीचे दब गया। उसने बहुत कोशिश की, लेकिन वह अपनी ताकत से उस पेड़ को नहीं हटा सका। गज्जू दर्द से कराहने लगा।
जब तूफान थमा, तो जानवर बाहर निकले। कुछ जानवरों ने गज्जू की हालत देखी और कहा, 'यह तो हुआ ही था, इसने किसी की बात नहीं मानी,' और वे चले गए। लेकिन जंगल के कुछ ताकतवर भालुओं और बाघ ने मिलकर गज्जू की मदद करने का फैसला किया। सबने मिलकर ज़ोर लगाया और उस भारी पेड़ को हटाकर गज्जू को आज़ाद कराया।
गज्जू को अपनी गलती का अहसास हुआ। उसे समझ आया कि ताकत से ज़्यादा ज़रूरी दूसरों का साथ और बड़ों की सलाह है। गज्जू ने भावुक होकर कहा, 'जब मैं मुसीबत में था, तब आपने मेरी मदद की। अब से मैं सबकी बात मानूँगा।' उस दिन के बाद गज्जू बदल गया।
Moral
घमंड इंसान को मुसीबत में डालता है, जबकि बड़ों की सलाह काम आती है।