एक छोटे से गाँव में कविन नाम का एक लड़का रहता था। उसके पिता एक मेहनती किसान थे जो बैलगाड़ी चलाते थे। कविन का एक बड़ा सपना था—वह एक बहुत बड़ा ज़मींदार बनना चाहता था और एक आलीशान जीवन जीना चाहता था।
एक दिन स्कूल में शिक्षक ने एक निबंध प्रतियोगिता की घोषणा की। विषय था, 'भविष्य में आप क्या बनना चाहते हैं?' कविन ने बहुत उत्साह से लिखा, 'मैं एक बहुत अमीर आदमी बनूँगा, मेरे पास एक बड़ा महल होगा और बहुत सारे जानवर होंगे।'
शिक्षक ने जब निबंध पढ़ा, तो उन्होंने कविन को पास बुलाया। उन्होंने प्यार से कहा, "कविन, तुम्हारी कल्पना बहुत अच्छी है, लेकिन यह एक निबंध है। तुम्हें यह लिखना चाहिए कि तुम वास्तव में क्या बनना चाहते हो और उसके लिए क्या करोगे। अभी यह किसी कहानी जैसा लग रहा है।"
कविन उदास होकर घर गया और अपने पिता को सब बताया। उसके पिता ने मुस्कुराते हुए कहा, "बेटा, सपने देखना बुरा नहीं है। लेकिन उन सपनों को पूरा करने के लिए मेहनत करनी पड़ती है। अगर लोग तुम्हारा मज़ाक उड़ाएँ, तो घबराना मत। बस अपने काम से उन्हें जवाब देना।"
अगले दिन, कविन ने अपना निबंध फिर से लिखा। उसने लिखा, 'मैं मेहनत और ईमानदारी से काम करके एक सफल किसान और ज़मींदार बनूँगा।' उसने समझ लिया कि सपने केवल सोचने से नहीं, बल्कि सही दिशा में मेहनत करने से पूरे होते हैं।
Moral
सपनों को सच करने के लिए कड़ी मेहनत और सही दिशा की आवश्यकता होती है।