एक सुंदर पहाड़ी राज्य में एक विशाल महल था। उस राज्य के राजा विक्रम अपनी ईमानदारी और न्यायप्रियता के लिए पूरी दुनिया में जाने जाते थे। उनका मानना था कि न्याय ही किसी भी राज्य की असली शक्ति होती है।
एक शाम, गाँव के उत्सव के दौरान, राजा की बेटी राजकुमारी नीला बहुत उत्साहित थी। खुशी के जोश में उसने गाँव के कुछ नियमों का उल्लंघन कर दिया। उसने उन सुंदर फूलों के बगीचों को नुकसान पहुँचाया, जिन्हें गाँव वालों ने बहुत मेहनत से सँवारा था।
गाँव के पहरेदार तुरंत वहाँ पहुँचे। जब उन्हें पता चला कि गलती राजकुमारी नीला की है, तो वे डर गए। 'हम राजा की बेटी को कैसे सजा दे सकते हैं?' उन्होंने आपस में कानाफूसी की। गाँव के अधिकारी सोमू बहुत परेशान था। उसे डर था कि अगर उसने सख्ती दिखाई तो राजा नाराज हो सकते हैं, और अगर कुछ नहीं किया तो अन्याय होगा।
अंत में, सोमू सीधे राजा के दरबार में गया। कांपते हाथों से उसने पूरी बात बताई। 'महाराज,' सोमू ने हिचकिचाते हुए कहा, 'राजकुमारी नीला से गलती हुई है। क्या हमें उनके शाही पद के कारण इसे अनदेखा कर देना चाहिए?'
राजा विक्रम ने दृढ़ता से कहा, 'सोमू, इस देश का कानून सबके लिए बराबर है। एक राज्य नियमों से चलता है, विशेषाधिकारों से नहीं। यदि हम अपने ही लोगों के लिए नियम बदल देंगे, तो प्रजा का विश्वास टूट जाएगा। राजकुमारी के खिलाफ भी वही कानूनी कार्रवाई करें जो एक साधारण नागरिक के लिए की जाती है।'
राजा के इस साहसी और न्यायपूर्ण निर्णय को देखकर सभी दंग रह गए। राजकुमारी नीला को भी अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने माफी माँगी।
Moral
न्याय सबके लिए समान होना चाहिए, चाहे वह राजा हो या प्रजा।