एक सुंदर से गाँव में सोमू नाम का एक किसान रहता था। उसके तीन बेटे थे। वे तीनों बहुत ताकतवर थे, लेकिन उनमें एक बड़ी कमी थी: वे हमेशा छोटी-छोटी बातों पर आपस में लड़ते रहते थे। वे एक-दूसरे की मदद करने के बजाय हमेशा मुकाबला करते थे। इससे सोमू बहुत दुखी और चिंतित रहता था।
एक शाम, सोमू ने अपने बेटों को बगीचे में बुलाया। उसके हाथ में एक पतली लकड़ी थी। उसने पूछा, "मेरे बेटों, क्या तुम इस लकड़ी को तोड़ सकते हो?"
तीनों बेटे हँसने लगे। एक-एक करके उन्होंने लकड़ी ली और बहुत ही आसानी से उसे तोड़ दिया। "यह तो बहुत आसान है पिताजी!" उन्होंने गर्व से कहा।
इसके बाद, सोमू ने लकड़ियों का एक बड़ा गट्ठर निकाला। उसने बहुत सारी लकड़ियों को एक मोटे धागे से बहुत मजबूती से बांध रखा था। उसने कहा, "अब इस गट्ठर को तोड़ने की कोशिश करो।"
सबसे बड़े बेटे ने सबसे पहले कोशिश की। उसने अपनी पूरी ताकत लगा दी, लेकिन गट्ठर नहीं टूटा। दूसरे बेटे ने कोशिश की, उसने और भी ज़ोर लगाया, पर गट्ठर टस से मस नहीं हुआ। तीसरे बेटे ने भी कोशिश की, लेकिन लकड़ियों का वह समूह बहुत मज़बूत था।
तीनों बेटे थककर बैठ गए। तब सोमू ने प्यार से समझाया, "देखा तुमने? जब लकड़ियाँ अकेली थीं, तो वे आसानी से टूट गईं। लेकिन जब वे एक साथ बँध गईं, तो वे इतनी मज़बूत हो गईं कि उन्हें कोई नहीं तोड़ सका। तुम तीनों भी इन लकड़ियों की तरह हो। अगर तुम लड़ते रहोगे, तो कोई भी तुम्हें नुकसान पहुँचा सकता है। लेकिन अगर तुम मिलकर रहोगे, तो दुनिया की कोई भी ताकत तुम्हें हरा नहीं पाएगी।"
बेटों को अपनी गलती का अहसास हुआ। उस दिन के बाद से उन्होंने लड़ना छोड़ दिया और मिल-जुलकर रहने का वादा किया।
Moral
एकता में ही शक्ति है।