एक घने जंगल के किनारे एक छोटा सा गाँव था। वहाँ कवि नाम का एक लड़का अपने पिता के साथ भेड़ें चराने जाया करता था। एक दिन, जब भेड़ें घास चर रही थीं, कवि ने झाड़ियों के पीछे एक विशाल आकृति को हिलते हुए देखा। उसके बड़े-बड़े पंख और चमकती त्वचा थी। कवि डर गया और दौड़कर घर गया और अपने पिता को सब बताया।
कवि के पिता तो डर गए, लेकिन कवि के मन में उस जीव को जानने की जिज्ञासा थी। वह फिर से जंगल में गया और उस अद्भुत जीव से मिला। "तुम यहाँ छिपकर क्यों रहते हो?" कवि ने धीरे से पूछा।
उस जीव ने उदास होकर कहा, "हमारा वंश बहुत पुराना है। लोग हमारी शक्ति से डरते हैं और हमारा शिकार करते हैं, इसलिए हम छिपकर रहते हैं।"
कुछ दिनों बाद, कवि ने सुना कि शिकारी इस जीव को खोजने आ रहे हैं। कवि तुरंत उस जीव के पास गया, लेकिन वह जीव डर से कांप रहा था। "मैं उनसे लड़ नहीं सकता, कवि," वह रोते हुए बोला।
कवि ने एक चतुर योजना बनाई। वह शिकारी के पास गया और बोला, "हुजूर, यह जीव खतरनाक नहीं है, बस लोग इसे नहीं जानते। अगर आप गाँव वालों को दिखा दें कि यह डरपोक और सीधा है, तो वे इसे नुकसान नहीं पहुँचाएंगे।"
शिकारी मान गया। गाँव वालों के सामने एक नाटक रचा गया। शिकारी ने दिखाया कि वह जीव से लड़ रहा है, और कवि के इशारे पर उस जीव ने हार मान ली और शांति से जमीन पर बैठ गया। कवि चिल्लाया, "देखो! यह हमें चोट नहीं पहुँचाएगा, यह तो बहुत सीधा है!"
गाँव वालों का डर खत्म हो गया। उस दिन के बाद से, वह जीव गाँव का हिस्सा बन गया। कवि की समझदारी से एक जीवन बच गया और एक नया दोस्त मिल गया।
Moral
बुद्धिमानी और समझदारी से डर को दोस्ती में बदला जा सकता है।