एक सुंदर बगीचे में चिप्पु नाम का एक छोटा चूहा रहता था। चिप्पु का काम बगीचे के बीजों को खाना था। एक दिन, माली ने सभी बीजों को एक बड़े मिट्टी के बर्तन में भरकर ढक्कन से बंद कर दिया।
चिप्पु को उन बीजों को खाने की तीव्र इच्छा हुई। वह बर्तन के छोटे से छेद से अंदर घुस गया। बीजों का स्वाद इतना अच्छा था कि चिप्पु खाता ही गया। जब उसका पेट बहुत फूल गया, तो उसने बाहर निकलने की कोशिश की, लेकिन वह छेद में फंस गया।
चिप्पु डर के मारे रोने लगा। पास से गुजर रहे डैश नाम के एक समझदार खरगोश ने उसकी रोने की आवाज़ सुनी और पूछा, 'क्या हुआ छोटे दोस्त?' चिप्पु ने अपनी समस्या बताई। खरगोश मुस्कुराया और बोला, 'घबराओ मत। बस यहीं आराम करो। जब खाना पच जाएगा, तो तुम्हारा पेट छोटा हो जाएगा और तुम आसानी से बाहर निकल जाओगे।'
चिप्पु ने खरगोश की बात मानी और सो गया। जब वह जागा, तो उसका पेट पहले जैसा हो गया था और वह आसानी से बाहर निकल आया। लेकिन चिप्पु के मन में लालच आ गया। उसने सोचा, 'इतने कम बीजों के साथ कैसे जाऊं? थोड़ा और खा लेता हूं।'
चिप्पु फिर से बर्तन के अंदर गया और ढेर सारे बीज खा लिए। बीज चबाने की आवाज़ सुनकर पास ही घूम रही एक बिल्ली बर्तन के पास आ गई। पेट फूल जाने के कारण चिप्पु फिर से फंस गया। बिल्ली ने बर्तन खोला और चिप्पु को पकड़ लिया। चिप्पु के लालच ने उसे मुसीबत में डाल दिया।
Moral
लालच बुरी बला है।