एक छोटे से गाँव में अर्जुन नाम का एक जिज्ञासु लड़का रहता था। एक शाम वह अपने दादाजी के पास बैठा था। उसने पूछा, 'दादाजी, लोग कहते हैं कि ज्ञानी पुरुष पूरी दुनिया को जानते हैं, पर वे कैसे?'
दादाजी ने मुस्कुराते हुए कहा, 'बेटा, क्योंकि वे अपनी पाँचों इंद्रियों को बहुत गहराई से समझते हैं। वे केवल देखते नहीं, बल्कि महसूस करते हैं।'
'कैसे दादाजी?' अर्जुन ने उत्सुकता से पूछा।
'स्वाद, दृष्टि, स्पर्श, ध्वनि और गंध—इन पाँचों के गुणों को जो पहचान लेता है, उसके लिए यह संसार एक खुली किताब की तरह है। वे हवा की खुशबू से मौसम बता सकते हैं और एक छोटी सी आहट से बदलाव समझ सकते हैं,' दादाजी ने समझाया।
उस दिन अर्जुन ने कोशिश की। वह बगीचे में बैठा और अपनी आँखें बंद कर लीं। उसने हवा में फूलों की धीमी महक को महसूस किया। उसने पत्तों की सरसराहट सुनी। उसने मिट्टी की नमी को अपने हाथों से छुआ। जब उसने एक फल खाया, तो उसने केवल मिठास नहीं, बल्कि उसके पूरे स्वाद का आनंद लिया। अर्जुन को समझ आया कि दुनिया को सिर्फ आँखों से देखना काफी नहीं है, बल्कि हर एहसास को गहराई से जीना ही असली ज्ञान है।