एक शांत गाँव में मल्लिका नाम की एक महिला रहती थी। वह बहुत ही दयालु और ईमानदार थी। उसका पति रवि एक व्यापारी था, जो काम के सिलसिले में अक्सर यात्रा पर रहता था। एक बार जब रवि एक लंबी यात्रा पर जा रहा था, तो उसने मल्लिका से कहा, 'मल्लिका, मेरी अनुपस्थिति में गाँव में कई नए लोग आएँगे, तुम अपना ध्यान रखना।'
कुछ महीनों बाद, व्यापारियों का एक बड़ा समूह उस गाँव में आया। उनमें से एक बहुत ही धनी व्यापारी मल्लिका के गुणों और स्वभाव से इतना प्रभावित हुआ कि उसने उसे अपने साथ ले जाने की योजना बनाई। उसने मल्लिका को कीमती गहने और रेशमी कपड़े उपहार में देने शुरू कर दिए। मल्लिका के सामने लालच का पहाड़ था, लेकिन उसका मन अपने पति के प्रति प्रेम और अपने संस्कारों में रमा था।
उस धनी व्यापारी के पास अपने खजाने की रक्षा के लिए ऊँची दीवारें और पहरेदार थे, लेकिन मल्लिका के पास उससे भी शक्तिशाली चीज़ थी—उसका चरित्र। उसने किसी भी प्रलोभन के आगे झुकने से इनकार कर दिया और अपनी गरिमा बनाए रखी। जब रवि वापस आया, तो उसने देखा कि मल्लिका वैसी ही अडिग और सम्मानित है जैसी वह उसे छोड़कर गया था। रवि समझ गया कि किसी व्यक्ति की असली सुरक्षा बाहरी पहरेदारों में नहीं, बल्कि उसके अपने चरित्र और सदाचार में होती है।