एक छोटे से गाँव में माधव और उसकी पत्नी मीरा रहते थे। वे बहुत अमीर नहीं थे, लेकिन उनका दिल बहुत बड़ा था। एक तूफानी रात, जब तेज़ बारिश हो रही थी, एक बूढ़ा यात्री उनके दरवाज़े पर आया। वह ठंड से काँप रहा था। माधव ने तुरंत दरवाज़ा खोला और उसे बड़े सम्मान के साथ अंदर बुलाया। मीरा ने उसे गरमा-गरम खाना और सोने के लिए एक कंबल दिया।
अगली सुबह जब यात्री जाने लगा, तो उसने माधव से कहा, 'बेटा, तुमने आए हुए मेहमान का तो बहुत अच्छे से ख्याल रखा, लेकिन तुम्हारी नज़र इस बात पर भी थी कि कहीं कोई और न आ जाए। जो व्यक्ति आने वाले मेहमान का भी इंतज़ार करता है, वही वास्तव में महान है।'
उस शाम, जब एक और यात्री आया, तो माधव पहले से ही तैयार था। उसने समझ लिया था कि केवल सामने वाले मेहमान की सेवा करना ही काफी नहीं है, बल्कि अगले मेहमान के स्वागत के लिए तत्पर रहना ही असली मानवता है।