एक सुंदर से गाँव में अर्जुन नाम का एक लड़का रहता था। उसके पास बहुत सारे खिलौने और मिठाइयाँ थीं। एक दिन उसने देखा कि उसका दोस्त रोहन बहुत उदास बैठा है। रोहन का पसंदीदा खिलौना टूट गया था। अर्जुन दौड़कर उसके पास गया और बोला, 'यह लो रोहन, तुम मेरे नए कार से खेल सकते हो!' अर्जुन ने उसे एक बड़ा खिलौना दिया, लेकिन उसका चेहरा गुस्से से भरा था और उसने कड़क आवाज़ में कहा, 'पर इसे खराब मत करना, समझे?' रोहन ने खिलौना तो ले लिया, पर उसे खुशी नहीं हुई। अर्जुन के कड़वे शब्दों ने उसे बेचैन कर दिया।
अगले दिन, राहुल नाम का एक और दोस्त आया। राहुल के पास देने के लिए कोई कीमती उपहार नहीं था। लेकिन, वह रोहन के पास बैठा, एक प्यारी सी मुस्कान दी और प्यार से बोला, 'रोहन, उदास मत हो। हम मिलकर तुम्हारे खिलौने को ठीक करने की कोशिश करेंगे। तुम बहुत बहादुर हो!' उन मीठे शब्दों ने रोहन के दिल को छू लिया। उसके चेहरे पर मुस्कान आ गई। अर्जुन के महंगे खिलौने से कहीं ज्यादा राहुल की बातों और मुस्कान ने रोहन को सुकून दिया।
यह सब देखकर अर्जुन को समझ आया कि केवल उपहार देना ही काफी नहीं है। चेहरे पर मुस्कान और मीठी वाणी के साथ बात करना किसी भी उपहार से कहीं बढ़कर है।