एक घने जंगल में अर्जुन नाम का एक लड़का अपने दादाजी के साथ रहता था। एक दिन जंगल में घूमते समय, उसने एक नन्हे पक्षी को देखा जो प्यास से तड़प रहा था। पक्षी इतना कमज़ोर था कि वह हिल भी नहीं पा रहा था। अर्जुन ने तुरंत अपनी बोतल से थोड़ा पानी निकाला और पक्षी को पिलाया। पानी पीते ही पक्षी में जान आ गई और वह उड़ गया।
कुछ हफ़्तों बाद, अर्जुन जंगल में खेल रहा था कि अचानक उसका पैर फिसल गया और वह एक गहरे गड्ढे में गिर गया। उसके पैर में चोट लग गई और वह बाहर नहीं निकल पा रहा था। जैसे-जैसे अंधेरा बढ़ने लगा, अर्जुन डर के मारे रोने लगा। तभी, वही नन्हा पक्षी अपने साथियों के साथ वहां आया और ज़ोर-ज़ोर से चहचहाने लगा। पक्षियों का शोर सुनकर दादाजी वहां पहुंचे और अर्जुन को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
अर्जुन ने महसूस किया कि उसकी एक छोटी सी मदद ने आज उसकी जान बचा ली। उसने समझा कि जब कोई व्यक्ति पूरी तरह असहाय हो, तब उसकी मदद करना दुनिया के सबसे बड़े धन से भी बढ़कर है।