एक छोटे से गाँव में अर्जुन और उसके पिता रवि रहते थे। रवि की एक छोटी सी किराने की दुकान थी। एक बार जब बहुत तेज़ बारिश हो रही थी, तब उनके पड़ोसी मिस्टर सैमुअल ने भारी बारिश की परवाह किए बिना रवि की दुकान के लिए ज़रूरी सामान पहुँचाया। उस मदद ने रवि के परिवार को बहुत बड़ी मुश्किल से बचाया था।
सालों बाद, अर्जुन एक सफल युवक बन गया। एक दिन, अर्जुन के एक पुराने मित्र विक्रम ने उससे मदद मांगी। विक्रम एक बहुत ही कठिन दौर से गुजर रहा था, लेकिन अर्जुन ने अपने अहंकार में आकर उसकी मदद करने से मना कर दिया।
यह देखकर रवि ने अर्जुन को पास बुलाया और समझाया, 'बेटा, इंसान से बहुत सी गलतियाँ हो सकती हैं और उन्हें सुधारा जा सकता है। लेकिन जो व्यक्ति दूसरों द्वारा किए गए उपकार को भूल जाता है या उपकार करने वाले के साथ बुरा करता है, वह सबसे बड़ा पाप करता है। उससे बचना नामुमकिन है।'
अर्जुन को अपनी गलती का अहसास हुआ। उसे मिस्टर सैमुअल की वह दयालुता याद आई। उसने महसूस किया कि कृतघ्नता (उपकार को न मानना) सबसे बुरा गुण है। उसने तुरंत विक्रम से माफी मांगी और उसकी मदद की। उसने सीखा कि जीवन में सबसे बड़ा धन दूसरों के प्रति कृतज्ञ होना है।