एक सुंदर जंगल में आर्यन अपने दादाजी के साथ रहता था। एक दिन जंगल में टहलते समय आर्यन ने एक कछुआ देखा। अचानक एक बड़ा पक्षी उस कछुए को पकड़ने के लिए झपटा। कछुआ घबराकर भागा नहीं, बल्कि उसने बहुत ही शांति से अपना सिर, पैर और शरीर अपने कठोर कवच के अंदर खींच लिया। पक्षी निराश होकर उड़ गया।
आर्यन ने हैरानी से पूछा, 'दादाजी, कछुआ भागा क्यों नहीं?' दादाजी मुस्कुराए और बोले, 'आर्यन, कछुआ अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण रखना जानता है। जब खतरा आता है, तो वह घबराने के बजाय खुद को सुरक्षित कर लेता है। यही असली शक्ति है।'
कुछ दिनों बाद, स्कूल में एक लड़के ने आर्यन को सबके सामने उकसाने की कोशिश की। आर्यन को बहुत गुस्सा आया, लेकिन उसे दादाजी की बात याद आई। उसने गहरी सांस ली और अपने गुस्से को अपने भीतर ही रोक लिया। वह शांति से वहां से चला गया। आर्यन के इस धैर्य को देखकर उस लड़के को शर्मिंदगी महसूस हुई। आर्यन समझ गया कि अपने मन और इंद्रियों पर काबू पाना ही सबसे बड़ी सुरक्षा है।