एक छोटे से गाँव में करी नाम का एक लड़का रहता था। वह बहुत ही होनहार था, लेकिन उसके मन में एक ही इच्छा थी कि वह बड़ा होकर बहुत प्रसिद्ध बने।
एक दिन जंगल के पास खेलते समय, करी को ज़मीन पर एक थैली मिली। जब उसने उसे खोला, तो उसकी आँखें फटी की फटी रह गईं—उसमें सोने के सिक्के भरे हुए थे! एक पल के लिए उसके मन में लालच आया, 'अगर मैं इसे रख लूँ, तो मैं बहुत अमीर बन जाऊँगा और किसी को पता भी नहीं चलेगा।'
तभी उसे अपने पिता की बातें याद आईं। उसके पिता हमेशा कहते थे, 'करी, चाहे कितनी भी दौलत मिल जाए, उसे गलत तरीके से मत पाना। तुम्हारा अच्छा आचरण ही तुम्हें महान बनाएगा।' करी समझ गया कि अगर उसने यह पैसा रखा, तो वह अमीर तो बन जाएगा, लेकिन समाज में उसका सम्मान और उसके माता-पिता का सिर गर्व से ऊँचा नहीं रह पाएगा।
करी ने तुरंत वह थैली ली और गाँव के मुखिया के पास पहुँचा। वह थैली गाँव के एक सम्मानित व्यक्ति की थी जो उसे खो जाने से बहुत परेशान थे। करी की ईमानदारी देखकर पूरा गाँव उसकी प्रशंसा करने लगा। उस व्यक्ति ने करी की पढ़ाई और भविष्य के लिए बहुत मदद की।
करी ने उस दिन सीखा कि धन से मिली अमीरी अस्थायी है, लेकिन अच्छे आचरण से मिला सम्मान हमेशा रहता है।