एक छोटे से गाँव में आर्यन नाम का एक लड़का रहता था। वह बहुत ही शांत और सरल स्वभाव का था। वहीं उसका सहपाठी रोहन थोड़ा शरारती था और उसे दूसरों का मज़ाक उड़ाना अच्छा लगता था। एक दिन स्कूल में दौड़ प्रतियोगिता हुई और आर्यन दौड़ में हार गया। यह देखकर रोहन ज़ोर से हँसा और सबके सामने बोला, 'आर्यन, तुम किसी काम के नहीं हो! तुम कभी नहीं जीत सकते!'
आर्यन को बहुत बुरा लगा। उसका मन हुआ कि वह भी रोहन को पलटकर जवाब दे, लेकिन तभी उसे अपने पिता की बात याद आई: 'भूख को सहन करना कठिन है, लेकिन दूसरों की कड़वी बातों को बिना क्रोध किए सहना उससे भी कहीं अधिक कठिन है।'
आर्यन ने एक गहरी साँस ली, अपनी आँखें बंद कीं और शांत रहकर वहाँ से चला गया। रोहन हैरान रह गया। आर्यन की इस शांति ने रोहन के मन में ग्लानि पैदा कर दी। अगले दिन रोहन ने आर्यन से आकर माफी माँगी। कड़वी बातों को सहन करके आर्यन ने साबित कर दिया कि असली ताकत चुप रहने और धैर्य रखने में है।