एक शांत गाँव में सोमू और रवि नाम के दो दोस्त रहते थे। सोमू बहुत ईमानदार था, लेकिन रवि को हमेशा दूसरों की चीज़ों से जलन होती थी। एक बार, गाँव के मुखिया ने अपने घर में एक कीमती सोने का पात्र रखा था। उसे देखकर रवि के मन में लालच आ गया। उसने सोचा, 'अगर हम इसे चुरा लें, तो हम बहुत अमीर बन जाएंगे।'
सोमू यह सुनकर दंग रह गया। उसने रवि को चेतावनी दी, 'रवि, दूसरों की संपत्ति का लालच करना बहुत बड़ा पाप है। इससे हमारा परिवार बर्बाद हो जाएगा।' लेकिन रवि ने उसकी बात नहीं मानी। एक अंधेरी रात में, रवि चोरी करने के लिए मुखिया के घर में घुसा। लेकिन जैसे ही उसने पात्र को छुआ, वह हाथ से फिसलकर ज़मीन पर गिर गया और ज़ोरदार आवाज़ हुई। गाँव वाले तुरंत वहाँ पहुँच गए और रवि को रंगे हाथों पकड़ लिया।
इसका परिणाम बहुत बुरा रहा। रवि के परिवार को पूरे गाँव में अपमानित होना पड़ा। उसके पिता, जो एक सम्मानित व्यक्ति थे, उनका सिर शर्म से झुक गया। रवि ने अपने लालच के कारण अपने परिवार की शांति और सम्मान दोनों खो दिए। अपनी गलती का एहसास होने पर रवि फूट-फूट कर रोने लगा। सोमू ने उसे समझाया, 'बेईमानी से कमाया गया धन उस आग की तरह है जो घर को ही जला देती है।' उस दिन के बाद, रवि ने हमेशा ईमानदारी से रहने का संकल्प लिया।