एक शांत गाँव में अर्जुन नाम का एक लड़का रहता था। वह पढ़ाई में बहुत तेज़ था और गाँव के सभी लोग उसकी बुद्धिमानी की प्रशंसा करते थे। वह हर समस्या का हल चुटकियों में निकाल लेता था।
एक बार गाँव में एक प्रतियोगिता हुई, जिसका पुरस्कार एक सोने का सिक्का था। अर्जुन ने वह प्रतियोगिता जीत ली। लेकिन जीत के बाद उसके मन में लालच आ गया। उसने सोचा, 'सिर्फ एक सिक्का? मुझे तो बहुत सारा सोना चाहिए।'
गाँव के मेले में एक खेल चल रहा था। अर्जुन ने अपनी तेज़ बुद्धि का उपयोग खेल जीतने के लिए नहीं, बल्कि दूसरों को धोखा देने के लिए किया। उसने बहुत चालाकी से दूसरे बच्चों के पास रखे सामान को चुराने की कोशिश की। उसे लगा कि उसकी चतुराई उसे पकड़ने नहीं देगी। लेकिन उसकी लालच ने उसे लापरवाह बना दिया और वह पकड़ा गया। जिस बुद्धि पर लोग गर्व करते थे, आज उसी बुद्धि के गलत इस्तेमाल ने उसे सबके सामने शर्मिंदा कर दिया। अर्जुन को समझ आया कि यदि बुद्धि के साथ ईमानदारी न हो, तो वह ज्ञान व्यर्थ है।