एक छोटे से गाँव में आर्यन नाम का एक लड़का रहता था। उसका एक छोटा भाई था, रोहन। रोहन बहुत शरारती था और अक्सर आर्यन को परेशान करता था। एक दिन, आर्यन ने बड़ी मेहनत से लकड़ी का एक खिलौना बनाया था, जिसे रोहन ने खेलते समय तोड़ दिया। आर्यन को बहुत गुस्सा आया। उसने सोचा, 'अब मैं इसे कभी नहीं छोड़ूँगा!'
अगले दिन, जब रोहन बाहर खेल रहा था, वह ठोकर खाकर गिर गया और उसके घुटने में चोट लग गई। दूसरे बच्चे उसे देखकर हँस रहे थे, लेकिन आर्यन हँसा नहीं। वह दौड़कर गया, रोहन को उठाया और उसे घर ले जाकर उसके घाव साफ किए। रोहन ने रोते हुए पूछा, 'भैया, मैंने तो आपको परेशान किया, फिर भी आपने मेरी मदद क्यों की?'
आर्यन ने प्यार से कहा, 'रोहन, गुस्सा करना आसान है, लेकिन जो हमारे साथ बुरा करे, उसके साथ बुरा न करना ही असली समझदारी है।' उस दिन के बाद से रोहन बदल गया और आर्यन का सबसे अच्छा दोस्त बन गया। उसने सीख लिया था कि बुराई का जवाब बुराई से देना बुद्धिमानी नहीं है।