एक शांत गाँव में किरण नाम का एक लड़का रहता था। किरण बुद्धिमान था, लेकिन उसमें एक बुरी आदत थी: वह मन ही मन दूसरों की असफलता पर खुश होता था। एक बार स्कूल में चित्रकला प्रतियोगिता हुई। उसका दोस्त रोहन बहुत सुंदर चित्र बना रहा था। किरण के मन में एक बुरा विचार आया, 'काश रोहन से कोई गलती हो जाए और वह हार जाए।'
अगले दिन रोहन के रंगों का डिब्बा खो गया। यह देखकर किरण को अंदर ही अंदर बहुत खुशी हुई। उसने सोचा, 'अब रोहन चित्र नहीं बना पाएगा और मैं जीत जाऊँगा।' लेकिन उस खुशी के साथ ही किरण के मन की शांति छिन गई। प्रतियोगिता के दौरान, किरण अपना ध्यान केंद्रित नहीं कर पाया और गलती से उसने अपने ही चित्र पर स्याही गिरा दी, जिससे उसका चित्र खराब हो गया। वह दुखी होकर बैठ गया। उसके दादाजी ने उसे समझाया, 'किरण, जो दूसरों के पतन की कामना करते हैं, उनका अपना पतन निश्चित है। यदि हम दूसरों का भला चाहेंगे, तभी हमारा भला होगा।' किरण को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने रोहन से माफी मांगी और उसकी मदद की। उस दिन के बाद से किरण हमेशा दूसरों की उन्नति की कामना करने लगा।