एक शांत गाँव में अर्जुन नाम का एक लड़का अपने दादाजी के साथ रहता था। अर्जुन का दिल बहुत कोमल था और वह सभी जीवों से प्रेम करता था। एक दिन, उसने अपने मित्र रोहन को मांस खाते हुए देखा।
अर्जुन ने पूछा, 'रोहन, तुम यह क्यों खा रहे हो?'
रोहन ने कहा, 'यह स्वादिष्ट है और इससे मुझे ताकत मिलती है!'
अर्जुन उदास होकर बोला, 'लेकिन रोहन, उस जीव ने अपना जीवन दे दिया ताकि तुम खा सको। अपने शरीर को बढ़ाने के लिए किसी और के शरीर का अंत करना, क्या यह दयालुता है?'
उस रात अर्जुन ने दादाजी को यह बात बताई। दादाजी ने समझाया, 'अर्जुन, सच्ची दया वह है जिसमें हम दूसरों के दर्द को अपना दर्द समझें। जो व्यक्ति अपना मांस बढ़ाने के लिए दूसरे के मांस का सेवन करता है, उसके मन में दया कैसे हो सकती है?'
रोहन ने जब यह सुना, तो उसे अपनी गलती का अहसास हुआ। उसने तय किया कि वह अब से सभी जीवों के प्रति दया भाव रखेगा।