एक शांत गाँव में कवि नाम का एक लड़का अपने दादाजी के साथ रहता था। एक दिन कवि और उसका मित्र रोहन खेल रहे थे, तभी उन्होंने झाड़ियों के पास एक छोटा सा खरगोश देखा। वह खरगोश बहुत ही प्यारा और कोमल था।
लेकिन रोहन की आँखों में एक अलग ही चमक थी। उसने कहा, 'कवि, देखो यह खरगोश कितना सुंदर है! अगर हम इसे पकाकर खाएँ, तो यह कितना स्वादिष्ट होगा!'
कवि को यह सुनकर बहुत दुख हुआ। उसने देखा कि खरगोश डर के मारे काँप रहा था। कवि ने धीरे से कहा, 'रोहन, किसी जीव के दर्द को देखे बिना केवल उसके स्वाद के बारे में सोचना गलत है। यह वैसा ही है जैसे किसी योद्धा का मन, जिसे केवल युद्ध और जीत की परवाह होती है, पर दूसरों के दुख की नहीं। क्या किसी की जान लेकर स्वाद लेना सही है?'
रोहन ने खरगोश की आँखों में देखा और उसे उसकी घबराहट महसूस हुई। रोहन का हृदय परिवर्तन हो गया। उसने उस विचार को त्याग दिया और उस दिन से वह सभी जीवों के प्रति दयालु बन गया।