एक शांत गाँव में अर्जुन नाम का एक लड़का अपने दादाजी के साथ रहता था। उसके दादाजी बहुत ही दयालु स्वभाव के थे और सभी जीवों से प्रेम करते थे। एक दिन बाज़ार में मांस देखकर अर्जुन ने पूछा, 'दादाजी, यह देखने में बहुत स्वादिष्ट लग रहा है, हम इसे क्यों नहीं खाते?'
दादाजी ने उसे पास बिठाया और एक चिड़िया की ओर इशारा करते हुए कहा, 'अर्जुन, देखो वह चिड़िया अपने बच्चों के लिए कितनी मेहनत कर रही है। यह मांस केवल भोजन नहीं है, यह उस जीवन का हिस्सा था जो कभी धड़कता था। जब जीवन ही चला गया, तो उस शरीर को केवल भोजन समझना हमारे हृदय की दयालुता को कम कर देता है।'
अर्जुन को यह बात गहराई से छू गई। उस रात उसने घर के बाहर एक भूखे पिल्ले को देखा। अर्जुन ने अपना खाना उसके साथ बाँटा। उस पिल्ले की आँखों में जो खुशी थी, उसे देखकर अर्जुन को एक अद्भुत शांति महसूस हुई। उसे समझ आ गया कि किसी जीव को नुकसान पहुँचाकर स्वाद लेने से कहीं बेहतर है किसी जीव की रक्षा करके शांति पाना।