एक शांत गाँव में लियो नाम का एक लड़का और उसके दादाजी रहते थे। उस गाँव के मंदिर में रोज़ सुबह श्रील नाम का एक व्यक्ति आता था। वह बहुत ही भक्ति भाव से पूजा करता था और हमेशा साफ़-सुथरे सफेद कपड़े पहनता था। गाँव के सभी लोग उसे बहुत ही नेक और धार्मिक इंसान मानते थे।
एक दिन लियो ने कुछ ऐसा देखा जिसने उसे हैरान कर दिया। जब कोई देख नहीं रहा था, तब श्रील एक बूढ़ी महिला से बहुत ही बदतमीजी से बात कर रहा था। साथ ही, वह लोगों को दिखाने के लिए दान देने का नाटक करता था, लेकिन असल में अपने पैसे बहुत छिपाकर रखता था।
लियो ने यह बात अपने दादाजी को बताई। दादाजी ने समझाया, 'बेटा, कुछ लोग केवल दिखावे के लिए अच्छे बनते हैं। वे बाहर से तो बहुत पवित्र दिखते हैं, लेकिन उनके मन में छल होता है। हमें केवल उनके बाहरी व्यवहार से उन्हें नहीं परखना चाहिए।'
लियो समझ गया कि असली अच्छाई वह नहीं है जो हम दूसरों को दिखाने के लिए करते हैं, बल्कि वह है जो हम वास्तव में अपने मन में रखते हैं।