एक सुंदर से गाँव में कथिर नाम का एक लड़का रहता था। उसे बागवानी का बहुत शौक था। उसका दोस्त सोमू भी उसी गाँव में रहता था। एक दिन, एक बुजुर्ग ने कथिर को एक विशेष बीज दिया और कहा, 'यदि तुम इसे ईमानदारी से पालोगे, तो यह ऐसे फल देगा जो सबको खुशी देंगे।' कथिर ने बीज बोया, लेकिन उसके मन में एक लालच आ गया। उसने सोचा, 'जब ये फल लगेंगे, तो मैं सबको धोखा देकर सारे फल खुद रख लूँगा और किसी को नहीं दूँगा।'
धीरे-धीरे पौधा बड़ा हो गया और उसमें सुंदर फल आ गए। कथिर उन फलों को छिपाने लगा। जब एक भूखा राहगीर फल माँगने आया, तो कथिर ने झूठ बोल दिया कि 'पौधा सूख गया है।' जब सोमू ने फल चखने की इच्छा जताई, तो कथिर ने कहा कि 'सारे फल सड़ गए हैं।' कथिर के पास बहुत फल थे, लेकिन उसके मन में शांति नहीं थी। वह हमेशा डर में रहता था कि कहीं कोई उसे पकड़ न ले।
एक रात बहुत तेज़ तूफान आया। अपने फलों को बचाने की कोशिश में कथिर फिसल गया और उसके सारे फल मिट्टी में मिल गए। अगली सुबह जब उसने देखा, तो वे सारे फल जो उसने धोखे से बचाकर रखे थे, सड़ चुके थे। उसने न केवल फल खो दिए, बल्कि गाँव वालों का भरोसा भी खो दिया। कथिर को समझ आ गया कि छल से पाई गई चीज़ अंत में केवल दुख ही देती है।