एक छोटे से गाँव में आर्यन नाम का एक लड़का रहता था। वह बहुत ही सच्चा और नेक दिल था। उसका दोस्त रोहन थोड़ा चतुर था, लेकिन वह अक्सर गलत रास्ते चुनने की सोचता था। एक दिन, जंगल में खेलते समय रोहन को एक पुराना थैला मिला। जब उसने उसे खोला, तो देखा कि वह सोने के सिक्कों से भरा था!
रोहन ने फुसफुसाते हुए कहा, 'आर्यन, चलो इसे चुपचाप घर ले चलते हैं। किसी को पता नहीं चलेगा!' आर्यन ने मना कर दिया, 'रोहन, यह हमारा नहीं है। इसे लेना चोरी होगी।' लेकिन रोहन नहीं माना और थैला छिपाकर घर ले आया।
उस दिन के बाद से रोहन की हालत बिगड़ने लगी। उसे हर समय डर लगता था, नींद नहीं आती थी और वह अक्सर बीमार महसूस करता था। उसे ऐसा लगने लगा जैसे उसका अपना शरीर ही उसे सजा दे रहा है। दूसरी ओर, आर्यन बहुत खुश और शांत था क्योंकि उसने सच बोला था।
जब रोहन ने देखा कि आर्यन कितना सुखी है, तो उसे अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने गाँव के मुखिया को सब सच बता दिया और सोने के सिक्के लौटा दिए। सच बोलते ही रोहन का डर और बीमारी गायब हो गई। उसे समझ आ गया कि ईमानदारी ही असली सुख है।