पहाड़ों के बीच बसे एक सुंदर गाँव में करिकालन नाम का एक लड़का रहता था। उसके पास लकड़ी का एक बहुत प्यारा खिलौना था। एक दिन खेलते समय, गलती से वह खिलौना टूट गया। डर के मारे करिकालन ने एक बड़ी गलती कर दी; उसने अपने दोस्त मुगिलन पर दोष मढ़ दिया और झूठ बोल दिया कि 'मुगिलन ने इसे तोड़ा है'।
उस शाम, मुगिलन को रोते हुए देखकर करिकालन को बहुत बुरा लगा। उसे न तो भूख लगी और न ही नींद आई। झूठ का बोझ उसके सीने में आग की तरह जल रहा था। उसे हर पल अपनी गलती का अहसास हो रहा था और उसका मन उसे अंदर ही अंदर कचोट रहा था।
अगली सुबह, करिकालन अपनी गलती मानकर मुगिलन के पास गया और सच बताकर माफी मांगी। सच बोलते ही उसके मन का बोझ हल्का हो गया और उसे चैन मिला।