एक शांत गाँव में कदिर नाम का एक लड़का रहता था। वह बहुत होशियार था, लेकिन उसकी एक बुरी आदत थी—जब भी वह कोई गलती करता, उसे छिपाने के लिए झूठ बोल देता था। एक दिन खेलते समय, कदिर से अनजाने में उसकी माँ का पसंदीदा मिट्टी का बर्तन टूट गया। डर के मारे उसने कह दिया, 'माँ, बिल्ली ने उसे गिरा दिया!'
उस रात कदिर को नींद नहीं आई। उसका मन बहुत भारी लग रहा था। अगले दिन स्कूल में, उसके दोस्त रवि ने अपनी एक सुंदर सी पत्थर की चीज़ खो दी थी, जो कदिर के पास गलती से आ गई थी। कदिर को अहसास हुआ कि झूठ बोलने से किसी को शारीरिक चोट तो नहीं पहुँचती, लेकिन उसके मन की शांति छिन गई है।
अगली सुबह, कदिर ने हिम्मत जुटाई और अपनी माँ के पास गया। उसने कहा, 'माँ, मुझे माफ़ कर दीजिए। कल वह बर्तन मैंने तोड़ा था, बिल्ली ने नहीं।' कदिर को लगा कि माँ डाँटेंगी, लेकिन माँ ने उसे गले लगा लिया और कहा, 'बर्तन टूटने का दुख है, लेकिन तुम्हारी सच्चाई देखकर मुझे तुम पर गर्व है।' कदिर का मन एकदम हल्का हो गया। उसने समझ लिया कि सच बोलना ही सबसे बड़ा गुण है जो हमें एक अच्छा इंसान बनाता है।