एक शांत गाँव में कदिर नाम का एक लड़का रहता था। वह बहुत होनहार था, लेकिन उसमें एक बुरी आदत थी—छोटी-छोटी बातों पर झूठ बोलना। एक दिन, खेलते समय कदिर से गलती से उसकी माँ का पसंदीदा मिट्टी का बर्तन टूट गया। डर के मारे कदिर ने तुरंत कह दिया, 'माँ, यह बिल्ली ने किया है!'
माँ ने उसे कुछ नहीं कहा, लेकिन कदिर को अपने अंदर एक भारीपन महसूस होने लगा। अगले कुछ दिनों तक कदिर ने बहुत सारे अच्छे काम किए, पढ़ाई की और घर की सफाई भी की, लेकिन वह झूठ उसके मन से नहीं निकल रहा था। उसे हर समय घबराहट होती रहती थी। एक दिन उसके दोस्त ने पूछा, 'कदिर, तुम इतने उदास क्यों हो?' कदिर के पास कोई जवाब नहीं था।
अंत में, कदिर ने सच बोलने का फैसला किया। अगली सुबह वह अपनी माँ के पास गया और रोते हुए बोला, 'माँ, मैंने झूठ बोला था। वह बर्तन मैंने तोड़ा था, बिल्ली ने नहीं। कृपया मुझे माफ़ कर दीजिए।' माँ ने उसे गले लगा लिया और प्यार से कहा, 'कदिर, तुमने इस हफ्ते बहुत से अच्छे काम किए, लेकिन आज तुमने जो सच बोला है, वही सबसे बड़ा पुण्य है। झूठ न बोलना ही सबसे बड़ा धर्म है।' उस दिन के बाद कदिर ने हमेशा सच बोलने का संकल्प लिया।