एक शांत गाँव में कविन नाम का एक लड़का रहता था। वह बहुत ही धैर्यवान और दयालु था। उसका सबसे अच्छा दोस्त रवि बहुत ऊर्जावान था, लेकिन उसमें एक कमी थी—उसे बहुत जल्दी गुस्सा आ जाता था। एक दोपहर, दोनों एक बड़े पेड़ के नीचे खेल रहे थे। कविन बहुत सावधानी से छोटी टहनियों की मदद से एक सुंदर छोटा घर बना रहा था।
तभी खेलते हुए रवि का पैर गलती से उस छोटे घर पर पड़ गया और वह टूट गया। रवि ने तुरंत माफी मांगी, लेकिन अपनी ही गलती पर उसे खुद पर बहुत गुस्सा आने लगा। गुस्से में आकर रवि ने पास पड़ा एक पत्थर जोर से फेंका। वह पत्थर उड़ता हुआ पास की एक टहनी पर लगे पक्षी के घोंसले से जा टकराया और घोंसला नीचे गिर गया। नन्हे पक्षी डरकर इधर-उधर उड़ने लगे।
रवि अपने गुस्से में इतना अंधा था कि उसने घोंसले के टूटने पर ध्यान ही नहीं दिया। तब कविन ने शांति से कहा, 'रवि, देखो तुम्हारे गुस्से ने न केवल घर तोड़ा, बल्कि उन पक्षियों का घर भी उजाड़ दिया। अगर तुम अपने गुस्से को नहीं रोकोगे, तो यह गुस्सा तुम्हें ही नुकसान पहुँचाएगा और तुम्हारी शांति छीन लेगा।' रवि को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने समझा कि क्रोध एक ऐसी आग है जो दूसरों से पहले खुद को जलाती है। उस दिन के बाद, रवि ने अपने गुस्से पर काबू पाना सीख लिया।